
रवीना टंडन हिन्दी फिल्मों की जानीमानी अभिनेत्री रही हैं. अक्षय कुमार के साथ उनकी जोड़ी 'मैं खिलाड़ी, तू अनाड़ी' बेहद चर्चित रही हैं. एक गाने 'तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त' के लोकप्रिय होने के बाद वे 'मस्त गर्ल' के रूप में मशहूर हुईं. वे 43 साल की हैं और अभी तक न केवल चुस्त व तंदुरुस्त हैं, बल्कि सफल मातृत्व का सुख भी भोग रही हैं, उन्होंने करीब साढ़े पाँच दर्ज़न हिन्दी फिल्मों में काम किया है. वे कई पुरस्कार भी जीत चुकी हैं . उन्होंने अपने भोजन में से माँस, अंडा और चिकन से पूरी तरह तौबा कर ली है. वे 'पेटा' के लिए भी अभियान चलाए हैं.
रवीना टंडन ने पिछले दिनों अपने घर के बाहर एक भागा हुआ बंदर देखा और उन्होंने पीपल फॉर द ऐथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल पेटा की मदद से उसका बचाव किया है।रवीना ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर लिखा, हमारे घर एक भागा हुआ बंदर घुस गया और मैने पेटा को बुलाकर उसकी मदद की। बताया जाता है कि रवीना के घर बंदर को मांगने के लिये लोग पहुंचे थे लेकिन उन्होंने सभी को मना कर दिया। रवीना ने बंदर के लिये केले का इंतजाम किया और पेटा को मदद के लिये बुलाया। पेटा ने इस बंदर को गोआ के प्राइमेट ट्रस्ट इंडिया बचवा केन्द्र भेज दिया है जहां वह अन्य बंदरो के साथ रह सकेगा। उल्लेखनीय है कि रवीना टंडन पेटा से पहले से जुड़ी है। इसके पूर्व रवीना ने सामुदायिक कुत्तों को गोद लेने संबंधी एक विज्ञापन में काम किया है।
रवीना टंडन के पिता फिल्मकार रवि टंडन थे. उनकी मां का नाम वीना था और अपने माता पिता के नाम पर ही उनका नाम रवीना पड़ा.मुंबई के “जमनाबाई नर्सरी स्कूल” और “मिठीबाई कॉलेज” से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में कदम रखा.कॉलेज के दौरान ही उन्हें फिल्में करने का ऑफर मिलने लगा.
साल 1991 में फिल्म “पत्थर के फूल” से रवीना ने अपने कॅरियर की शुरूआत की. इसके बाद उन्हें 1994 में “मोहरा” और दिलवाले जैसी सुपरहिट फिल्में करने का मौका मिला जहां उन्होंने अपनी अदाकारी का जमकर प्रदर्शन किया. इन दो फिल्मों ने उन्हें बॉलिवुड की टॉप हिरोइनों में ला खड़ा किया. 1995 की फिल्म “अंदाज अपना अपना” और “जमाना दीवाना” से उन्होंने अपने कॅरियर को सफल बनाए रखा.
साल 1996 और 1997 में रवीना टंडन की दो सफल फिल्में आईं जिसमें फिल्म “खिलाड़ियों का खिलाड़ी” और इसके अगले साल प्रदर्शित फिल्म “जिद्दी” शामिल थी. इसके बाद कुछ समय के लिए रवीना टंडन ने कॉमेडी फिल्में की. लेकिन इसके बाद “घरवाली बाहरवाली”, “आंटी नंबर वन” और “दुल्हे राजा” जैसी औसत फिल्मों की वजह से उनका क्रेज कम होने लगा. रवीना टंडन ने शूल, बुलंदी और अक्स जैसी आर्ट फिल्मों में भी सफलता का स्वाद चखा. अक्स के लिए उन्हें फिल्मफेयर स्पेशल परफॉर्मेंश अवार्ड भी मिला. साल 2001 में आई फिल्म दमन में शानदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. सत्ता, दोबारा, एक से बढ़कर दो जैसी फ्लॉप फिल्मों ने साफ कर दिया कि दर्शकों पर अब रवीना का जादू खत्म हो चुका है. हाल ही में साल 2011 में रवीना टंडन ने फिल्म “बुढ्ढा होगा तेरा बाप” में एक छोटा सा किरदार निभाया था. करीब 13 साल तक फिल्मों में काम करने के बाद रवीना ने वितरक अनिल टंडानी से 2004 में शादी की. उनके दो बच्चे बेटी राशा और बेटा रणवीर हैं. एक सफल फिल्मी जीवन जीने के बाद अब रवीना अपने परिवार के साथ खुश हैं. इसे ही कहते हैं सफलता की अच्छी कहानी जहां अंत भी भला हो





