
राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने इस बार एक जबर्दस्त फैसला किया है। उसके हजारों सदस्य रमजान के दिनों में जो इफ्तार करेंगे, उसमें गोमांस नहीं परोसा जाएगा। उसकी जगह रोज़ादारों का उपवास गोरस याने गाय के दूध से खोला जाएगा। क्या कमाल की बात है, यह! यह बात मैं मुस्लिम देशों के कई मौलानाओं, राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, प्रोफेसरों और पत्रकारों से वर्षों से कहता आ रहा हूं। कुछ देशों में इसका पालन भी होने लगा है। मैं तो उनसे कहता हूं कि गाय का ही नहीं, किसी भी जानवर का गोश्त क्यों खाया जाए?
पवित्र कुरान में एक भी ऐसा अध्याय (सूरा) नही है, जिसमें गाय अथवा बैल को मारने के संबंध में आदेश दिये गये हों। बल्कि ऐसे आदेश और ऐसा परामर्श अनेक स्थानों पर दिया गया है कि इनसानों को क्या खाना चाहिए। उनके खान पान में किन वस्तुओं का समावेश होना चाहिए। हमारी खाने पीने की आदतें किस प्रकार की होनी चाहिए, इसकी भी चर्चा की गयी है। अल्लाह ने आदम को आदेश देते हुए कहा, तुम और तुम्हारी पत्नी जब स्वर्ग में थे, उस समय हमने तुम्हें फल खाने के लिए दिये। और तुम अब जहां भी रहोगे वहां भी तुम्हें फल खाने के लिए…
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अजमेर ईद उल अजहा के मौके पर एक व्यक्ति ने शाकाहारी भंडारे का आयोजन किया। इस अनूठी पहल के तहत अब तक जहां कच्चे गोश्त का वितरण किया जाता था, वहां अब हलवा, पूड़ी और सब्जी बांटी गई।बेट्री व्यवसायी सलीम भाई कुरैशी ने बताया कि वे लगातार 10 सालों से कुरान समेत विभिन्न धर्मों की किताबों का अध्ययन कर रहे हैं।…
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