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हृदय की बढ़ती धड़कन, बेचैनी, घबराहट, उच्च रक्त चाप और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए लौकी का सेवन रामबाण साबित हुआ है। लौकी पाचक होती है। पेट संबंधी रोगों में भी अचूक औषधि के समान है। यह विचार राष्ट्रीय शाकाहार शोध संस्थान नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ.मनोज कुमार जैन ने जैन मार्केट स्थित शाकाहार चिकित्सा एवं शोध केंद्र पर आयोजित गोष्ठी के दौरान व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि 5 सौ ग्राम लौकी को छिलके सहित कद्दूकस करके अथवा जूसर में डालकर रस निकाल लें, जिसमें 7 तुलसी पत्र, सात पुदीना के पत्ते पीस कर मिला लें। रस के बराबर पानी मिला दें चार काली मिर्च, एक ग्राम सेंधा नमक के साथ पीसकर घोल बना लें। भोजन के तीस मिनट बाद दोपहर में और रात में इसका नियमित सेवन करें। इसके सेवन से हृदय रोग से मुक्ति मिलती है। शल्य चिकित्सा से भी बचा जा सकता है। डायटीशियन छवि जैन ने कहा कि यदि पेट खराब रहता है तो लौकी का रस पेट में पल रहे विकारों को दूर का देता है। हृदय रोगियों के लिए मांस, मदिरा एवं धूमपान का त्याग करना आवश्यक है। शाकाहार शोध छात्रा रजिया अंसारी ने कहा कि हृदय रोगियों को उच्च रक्तचाप से बचने के लिए प्रतिदिन शाकाहारी भोजन में विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, मिनरल, कार्बोहाइड्रेट, फॉस्फोरस जैसे पौष्टिक तत्वों को शामिल करना चाहिए। इस मौके पर सुशील यादव, राखी जौहरी, महावीर जैन, अनामिका, प्रदीप भटनागर, श्रुति जैन, रामवीर शाक्य मौजूद रहे।

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