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मानें या ना मानें मांसाहार नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय दृष्टि से तो नुकसानदेय है ही, सेहत की दृष्टि से भी हानिकारक है। नैतिक या आध्यात्मिक आधार पर भले मांसाहार छोड़ना गंवारा न हो पर केलिफोर्निया के हृदयरोग विशेषज्ञ डा. डीन ओरनिश के अनुसार केवल शाकाहार अपनाकर हृदय और कैंसर रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है।

दवाईयां तो लेनी होगी लेकिन उनका असर सत्तर प्रतिशत तेजी से होगा। डा. डीन पहले ऐसे चिकित्सा विज्ञानी हैं जो रोगियों को बिना चीर फाड़ किए ठीक करने में यकीन करते हैं। न केवल यकीन करते हैं, बल्कि उन्होंने इलाज के लिए आए मरीजों की खानपान की आदतें बदल कर उन्हें ठीक किया है।

ब्रिटेन में हुए एक ताजा अध्ययन के मुताबिक शाकाहारी लोगों में कैंसर और हृदय रोगों का जोखिम मांसाहारी लोगों की तुलना में 40 प्रतिशत और असमय मृत्यु का खतरा 20 प्रतिशत कम होता है।

इस अध्ययन के मुताबिक मांसाहार के पक्ष में पर्यावरण, प्रकृति संतुलन और आसानी से पौष्टिक भोजन मिल जाने की जो दलीलें दी जाती हैं वे सब गलत साबित हुई हैं। अध्ययन के अनुसार मनुष्य की आंतों से लेकर पाचन संस्थान के तमाम अंग अवयव जिनमें जीभ, दांत, ओठ, हाथ पैर की अंगुलियां भी शामिल हैं, मांसाहार के लिए कतई उपयुक्त नहीं है।

शरीर स्वयं विकसित हुआ हो या प्रकृति ने बनाया हो वह अनाज और शाकपात से ही पोषक रस खींच सकता है। हजम करने के लिए मांस को जिस हद तक पकाया जाता है, वह गए गुजरे किस्म के अनाज से भी गया बीता हो जाता है। सार यह कि मनुष्य को स्वस्थ और पुष्ट रखने के लिए शाकाहार ही उपयुक्त है। और स्वस्थ शरीर में आत्मा के विकास की पर्याप्त संभावना रहती है।

(सौ : अमर उजाला)

 

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