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सर्दी के सितम से बचाव करने में शाकाहार पद्धति काफी कारगर साबित होती है। सर्दी में खून का जमना, पानी की कमी होना, हार्टअटेक फेफड़ों में कमजोरी जैसी गंभीर बीमारियां अपना प्रभाव दिखाती हैं। यदि हम अपने भोजन में शाकाहार जीवन पद्धति को अपनाएं तथा नियमित योग करें तो सर्दी के प्रकोप का कम कर सकते हैं। उक्त विचार राष्ट्रीय शाकाहार शोध संस्थान नई दिल्ली के शाकाहार विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार जैन ने जैन मार्केट में आयोजित गोष्ठी के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में हृदय रोग की आशंका अधिक रहती है। कहा कि गर्म कपड़े पहने, खुले में घूमने से बचें। डॉ. जैन ने कहा कि छोटे बच्चों को सर्दी से बचाव करें तथा उन्हें जायफल सिल पर घिस कर दें। निमोनिया होने पर गाय के घी में नमक मिलाकर बच्चों की छाती में मलें तथा बड़ों की पसलियों के निचले भाग में दर्द होने पर या सांस लेते समय छाती से कफ की स्थिति में रोगी की छाती पर सरसों के तेल में कपूर व तारपीन का तेल मिलाकर मलें। उन्होंने कहा कि अदरक, सोंठ, अजवायन, अखरोट, काजू, बादाम, लहसुन, सूखा नारियल, गुड आदि खाद्य पदार्थ शरीर में भरपूर गर्मी प्रदान करते हैं। यदि व्यक्ति सर्दी से पीड़ित है तो सोंठ व गुड़ मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करें तो सर्दी तुरन्त दूर हो जाएगी। गाजर, बथुआ, शलजम, पालक, चुकंदर का गर्म सूप दिन में आधा-आधा गिलास दिन में दो बार लेने से भरपूर ऊर्जा एवं कमजोरी में तुरन्त आराम मिलता है।

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