
बार्सिलोना। लोग मांसाहार कम से कम करें और शाक-सब्जी और फल ज्यादा लें तो न सिर्फ उन्हें लाभ होगा बल्कि धरती को भी फायदा होगा। धरती पर बढ़ रही गर्मी कम होगी, पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान कम होगा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ रहे खर्च में कमी आएगी।
भविष्य के भोजन पर ऑक्सफोर्ड मार्टिन प्रोग्राम के मार्को स्प्रिंगमैन ने अमेरिका के नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अपनी अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया है। इसके अनुसार, दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ रहे सबसे बड़े खर्च की वजह असंतुलित भोजन है।
यह रिपोर्ट ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अध्ययन पर आधारित है। दुनिया में शाकाहार बढ़ने पर उसके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर होने वाले असर को लेकर किया गया यह पहला अध्ययन है। इसमें कहा गया है कि अगर लोग भोजन में फल और सब्जी की मात्रा बढ़ाएं और मांस की मात्रा कम रखें, तो मृत्यु दर भी फर्क पड़ेगा।
अभी जो दर है, ऐसा होने पर उसमें 2050 तक दुनिया में हर साल 51 लाख कम लोगों की मृत्यु होगी। अगर लोग अंडे और दूध भी त्याग दें और पूरी तरह शाकाहारी हो जाएं तो हर साल 81 लाख मौतें कम हो सकती हैं।
शुद्ध शाकाहार अपनाने पर खाद्य पदार्थ संबंधी उत्सर्जन 63 प्रतिशत तक कम हो जाएंगे। दरअसल, मांसाहार के लिए पशुओं को तैयार करते समय उनके लिए भोजन तैयार करने, उन्हें काटने, पैकेट बंद स्थितियों में उन्हें एक से दूसरी जगह ले जाने, उन्हें पकाने वगैरह का पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इन पर रोक लग जाए तो स्वास्थ्य सेवाओं पर दुनिया भर में होने वाले खर्च पर हर साल 70 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ डॉलर तक कमी आ जाएगी।
स्प्रिंगमैन का कहना है कि हर व्यक्ति के शाकाहारी हो जाने की बात हम नहीं कह रहे हैं लेकिन शाकाहारियों की संख्या बढ़ना जरूरी है। इसका सबसे अधिक फायदा विकासशील देशों को होगा।





