
भारतीय ज्ञान और दर्शन दुनियाभर के लोगों को लुभाता आया है। यहां से निकले बहुत से संतों और प्रचारकों ने विभिन्न प्रांतो, प्रदेशों, देशों में इस ज्ञान के बल से करोड़ों लोगों को सहिष्णुता, मानवीयता और शाकाहारी होने के लिए प्रेरित किया। जोधपुर के बिजनेसमैन वीरेंद्र भण्डारी भी जापान के लोगों को शाकाहार अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।
इस तरह प्रभावित हुए जापानी
बिजनेसमैन भण्डारी ने बताया कि 1999 में आंध्रप्रदेश के पुट्टपर्थी स्थित सत्य साईं के सान्निध्य में रहने के दौरान जापानी पर्यटकों से उनकी मुलाकात हुई। बिजनेस के चलते वे पर्यटकों को बेंगलुरू एयरपोर्ट लेने जाया करते और मार्ग में आने वाले देवनली जैन मंंदिर में भोजन की व्यवस्था करवाते।यहां वीरेंद्र ने जापानी पर्यटकों को शाकाहार का महत्व बताते हुए समझाया कि जन्म और मृत्यु मनुष्य के वश की बात नहीं होती। इसलिए पशुओं और जीवों की हत्या कर खाने का अधिकार भी मनुष्यों के पास नहीं है। वीरेंद्र के इन शब्दों से प्रभावित होकर कई जापानियों में जैन धर्म व दर्शन को जानने की इच्छा प्रबल हुई।
2200 लोगों को बनाया शाकाहारी
वीरेंद्र ने बताया कि जापानी पर्यटकों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। इस बीच वे जोधपुर व आसपास के जैन मंदिरों के दर्शन करवाने के लिए पर्यटकों को लाते रहे। जैन धर्म से प्रभावित कई जापानी परिवारों ने न केवल इसे अपनाया, बल्कि पारणा करवाने के बाद वे व्रत-उपवास आदि भी रखने लगे। जापान यात्रा के दौरान उन्होंने अन्य लोगों को भी शाकाहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि अब तक वे करीब 2200 से अधिक जापानियों शाकाहारी बना चुके हैं।





