
रिटिश मैडीकल जर्नल ने 8179 लोगों पर साऊथैंपटन विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन को सूचित किया है। अनुसंधानकत्र्ताओं ने पाया कि जो लोग 30 वर्ष की आयु तक शाकाहारी बन गए थे उनमें बुद्धिमत्ता का स्तर मांसाहारियों से अधिक था-5 प्वाइंट से अधिक तक।
शाकाहारी पुरुषों का आई.क्यू. स्कोर 106 था जबकि मांसाहारी पुरुषों में यह 101 था। जहां महिला शाकाहारियों का औसत 104 था वहीं उनकी तुलना में मांसाहारियों का 99 था। अनुसंधानकत्र्ताओं ने बुद्धिमत्ता का संबंध स्वास्थ्य के साथ पाया परंतु यह अभी निर्धारित नहीं हो पाया है कि जो लोग अधिक बुद्धिमान होते हैं वे शाकाहारी बन जाते हैं अथवा शाकाहारी लोगों का स्वास्थ्य काफी बेहतर होता है विशेषकर हृदय रोग तथा मोटापे के संबंध में कि उनके मस्तिष्क अधिक विकसित होते हैं। मैं दूसरे वाले सिद्धांत से सहमत हूं। आखिरकार कोई व्यक्ति जो किसी शाकाहारी परिवार में जन्मा है वह अपने मस्तिष्क का उपयोग इस विकल्प को चुनने के लिए नहीं करता है। यह तथ्य कि वह अधिक बुद्धिमान होता है इसके कारण हो सकता है कि उसके शरीर ने अधिक समय मस्तिष्क के विकास के लिए दिया था बजाय उसमें ठूंसे गए भोजन से लडऩे के लिए अन्यथा जैन तथा मारवाड़ी समुदाय की मानसिक क्षमताओं को कैसे स्पष्ट किया जा सकता है? अथवा ब्राह्मणों की क्षमताओं को? ब्रिटिश मैडीकल जर्नल के अनुसंधानकत्र्ता कहते हैं कि यह स्पष्ट नहीं है कि शाकाहारी अधिक बुद्धिमान क्यों होते हैं-परंतु वे स्वीकार करते हैं कि फल तथा सब्जियों वाला भोजन किसी प्रकार से मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ा सकता है। अध्ययन यह भी कहता है कि शाकाहारियों के अधिक डिग्रियां प्राप्त करने और महत्वपूर्ण पदों को संभालने की संभावना भी अधिक है।
मैं इस निष्कर्ष से आश्चर्यचकित नहीं हंू। भारत में उपलब्धियां हासिल करने वाले 75 प्रतिशत शाकाहारी हैं। शीर्ष व्यापारी, शीर्ष व्यापारी वर्ग, अधिकांश शीर्ष राजनेता तथा फिल्मी सितारे, मॉडल, धावक। मांसाहारी वातावरण (सेना) में पालन-पोषण होने के बावजूद मुझे प्रसन्नता है कि मेरे पति संजय ने 18 वर्ष की आयु में मुझे शाकाहारी बना दिया था। मेरा सबसे प्रिय शाकाहारी, मेरा पुत्र वरुण जन्म से ही शाकाहारी है और उसका आई.क्यू. 161 है (जो इस सिद्धांत को प्रमाणित करता है)। जितने भी शाकाहारी व्यक्तियों से मैं परिचित हूं वे औसत से काफी अधिक बुद्धिमान हैं। मेरे पास मेरे प्रिय शाकाहारियों की एक लंबी सूची है और भगवान का शुक्र है कि उसमें भारत से कई लोग शामिल हैं। मैंनेइस सूची में केवल सबसे अधिक बुद्धिमानों को ही शामिल किया है-सबसे आकर्षक, सबसे सुंदर आदि को फिर कभी शामिल करूंगी।
जहां तक मुझे ज्ञात है, सभी भारतीय आध्यात्मिक शिक्षक तथा गुरु शाकाहारी हैं। श्री श्री रवि शंकर उनमें सबसे आगे हैं क्योंकि उन्होंने बुद्धिमान व्यक्तियों का एक ऐसा साम्राज्य विकसित किया है जो एक दयालु भारत के परिष्करण का प्रयास करते हुए आधुनिक भारत को अपनातेहैं।
डा. बिन्देश्वर पाठक भारत का सबसे बड़ा एन.जी.ओ. चलाते हैं। उन्होंने अपना जीवन स्वच्छता मुहैया करवाने के लिए समॢपत कर दिया है तथा ग्रामीण ऊर्जा प्राप्त करने के सबसे पारिस्थितिकीय अनुकूल तरीके को ढूंढा है।
हजारों ऐसे व्यक्ति भी हैं जो उतने ही कुशाग्र हैं परंतु मुझे उन्हें एक अलग समूह में डालना पड़ता है। उदाहरण के लिए मेरी मां। उनकी तीव्र बुद्धिमत्ता तथा जीवन की आकांक्षा ने हमें उन सभी संकटों से उबारा है जिनसे अन्य नश्वर व्यक्ति तबाह हो जाते।
प्रसिद्ध शाकाहारी बुद्धिजीवियों पर ध्यान देने से कुछ भी सिद्ध नहीं होता है परंतु उनके भोजन पर ध्यान देने से काफी कुछ सिद्ध होता है। इतिहास में दर्ज हजारों महान ङ्क्षचतक शाकाहारी थे और उन्होंने शाकाहार की वकालत की थी। इसमें पाइथागोरस, आइजैक न्यूटन, अल्बर्ट आइन्स्टीन, लिओ टॉलस्टाय, प्लैटो, वाल्टेयर, महात्मा गांधी, चाल्र्स डाॢवन, अल्बर्ट शूटजर, डा. बेंजामिन स्पोक, फ्रांज काफका, एच.जी. वेल्स, हेनरी डेविड थोरो, आइजैक बाशेविस ङ्क्षसगर, जर्मी बेन्थम, लियोनार्डो दा विन्सी, मिल्टन, निकोला टेस्ला, पर्सी शैले, जीन जैक्स रूसो, राल्फ वाल्डो एमर्सन, सुकरात, टॉलस्टाय, विलियम वर्डसवर्थ, विलियम ब्लेक, डा. सी.वी. रमन, एनी बेसैंट, ब्रांटे बहनें, रूपर्ट ब्रोक, आइजैक पिटमैन, ओविड, हैनरी सॉल्ट, शोपेनहॉवर, सेनेका, हैनरी शामिल हैं। यदि किसी व्यक्ति के बुद्धिमान होने के लिए मांस खाने की आवश्यकता होती तो हम कुछ बुद्धिमान व्यक्तियों को शाकाहार की वकालत करते क्यों देखते। जार्ज बर्नार्ड शा ने कहा था, ‘‘मेरे दिमाग जैसा कोई व्यक्ति अपने पोषक तत्वों को गाय से प्राप्त नहीं कर सकता है’’ जबकि बेंजामिन फ्रेंकलिन ने कहा था कि शाकाहारी भोजन ‘स्पष्ट मस्तिष्क और शीघ्र समझ’ में परिणत होता है।
बी.बी.सी. वन के प्रत्येक शनिवार आने वाले एक अत्यधिक लोकप्रिय कार्यक्रम ‘नैशनल आई.क्यू. कांटैस्ट’ में 80,000 लोगों ने भाग लिया। इसमें विजेता, जोकि यू.के. के सबसे बुद्धिमान लोग थे, वे शाकाहारियों का 40 व्यक्तियों का एक दल था जिनका औसत आई.क्यू. स्कोर 113 था। सबसे अधिक आई.क्यू. वाला एकल प्रतियोगी भी एक शाकाहारी था। ग्लाऊस्टर से 5 बच्चों की मां, 68 वर्षीय मैरी बीडमीड, जोकि विजेता थी, ने कहा कि ‘‘मैं कभी भी अपने को इतना बुद्धिमान नहीं समझती थी। मैं मानती हूं कि शाकाहारी अच्छे ङ्क्षचतक होते हैं। शुरू से ही हम भोजन खाने के संबंध में बुद्धिमत्ता दिखाते हैं।’’
यदि कुछ ऐसा है जो यह सिद्ध करता है कि मानव शाकाहारी होने के लिए बने हैं तो वह अध्ययन है। आज के विश्व में जीवित रहने के लिए आपको सारी बुद्धिमत्ता चाहिए होती है। माता-पिता आप अपने बच्चों की और सहायता करें। उन्हें आज ही शाकाहारी बनाएं।





