
विश्व भर के शाकाहारियों को एक स्थान पर लाने और खुरपका-मुँहपका तथा मैड काओ जैसे रोगों से लोगों को बचाने के लिए उत्तरी अमेरिका के कुछ लोगों ने 70 के दशक में नॉर्थ अमेरिकन वेजिटेरियन सोसाइटी का गठन किया। सोसाइटी ने 1977 से अमेरिका में विश्व शाकाहार दिवस मनाने की शुरूआत की। अब एक नवम्बर को शाकाहार दिवस के रूप में मनाया जाता है। सोसाइटी मुख्य तौर पर शाकाहारी जीवन के सकारात्मक पहलुओं को दुनिया के सामने लाती है। इसके लिए सोसाइटी ने शाकाहार से जुड़े कई अध्ययन भी कराए हैं। दिलचस्प बात यह है कि…
शाकाहार प्राणी को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ता है। ‘जीओ और जीने दो’ सहजीवी जीवन-पद्धति का उत्प्ररेक है। उल्लेखनीय होगा कि विश्व शाकाहार कांग्रेस द्वारा इस सम्बन्ध में पुर जोर प्रयास किए जा रहे हैं। शाकाहार के बढ़ते निरापद प्रभाव को महसूस करते हुए संसार के ७३ देश विश्व शाकाहार कांग्रेस के सदस्य बन चुके हैं। विश् व शाकाहार दिवस दिनांक १ अक्टूबर को मनाया जा रहा है; तो २ अक्टूबर को महात्मा गाँधी जयन्ती दिवस तथा ३ अक्टूबर को पशुओं के प्रार्थना दिवस के रूप में मना रहे हैं। इण्डियन पेडरेशन ऑफ अहिंसा आर्गेनाईजेशन्स कलकत्ता के तत्वाधान में ‘‘भक्ष्य-अभक्ष्य विकल्प की खोज’’ थीम पर राष्ट्रीय अहिंसा सम्मेलन आयोजित किया गया है एक ओर बड़े राष्ट्र अत्याधुनिक हथियारों व अन्य उपकरणादि पर अन्धाधुन्ध तरीके से बेतहाशा खर्चा करते जा रहें हैं। तो दूसरी ओर छोटे देशों के सामने भी रक्षार्थ एतद् व्यय-भार भुगतने की विवशता हैं। झूंठे दम्भ और शक्ति के मद में बौराये प्रतीत होते हैं। इस प्रवृत्ति पर अंकुश अत्यावश्यक है।…

डॉ अनेकांत कुमार जैन
मुस्लिम समाज में कुर्बानी और मांसाहार आम बात है,किन्तु ऐसे अनेक उदाहरण भी देखने में आये हैं जहाँ इस्लाम के द्वारा ही इसका निषेध किया गया है। इसका सर्वोत्कृष्ट आदर्शयुक्त उदाहरण हज की यात्रा है। मैंने इसका वर्णन साक्षात् सुना है तथा कई स्थानों पर पढ़ा है कि जब कोई व्यक्ति हज करने जाता है तो इहराम (सिर पर बाँधने का सफेद कपड़ा) बाँध कर जाता है। इहराम की स्थिति में वह न तो पशु-पक्षी को मार सकता है न किसी जीवधारी पर ढेला फेक सकता है और न घास नोंच सकता है। यहाँ तक कि वह किसी हरे-भरे वृक्ष की टहनी पत्ती तक भी नहीं तोड़ सकता। इस प्रकार हज करते समय अहिंसा के पूर्ण पालन का स्पष्टविधान है,कुरआन में लिखा है - ‘इहराम की हालत में शिकार करना मना है’।…

लेखक: भारत डोगरा
इन दिनों दुनिया भर में शाकाहार का चलन बढ़ रहा है। जिन समाजों में मांसाहार का प्रचलन अधिक रहा है, वहां भी बहुत से लोग नॉनवेज छोड़कर वेजिटेरियन खानपान अपना रहे हैं। कई देशों में शाकाहारिता ने एक व्यापक अभियान का रूप ले लिया है। इससे जुड़े लोग बहुत निष्ठा से बाकायदा एक विचारधारा की तरह इसका प्रचार-प्रसार करते हैं। हमारे देश में तो ऐसे अभियान की सफलता की संभावना और भी अधिक है, पर दुर्भाग्यवश हाल के समय में इसने विकृत रूप ले लिया है।…





